होली के दिन भाभी की चुदाई

मई आप लोगो को अपनी होली की कहानी बताता हो अगले दिन होली रंग खेलने का था. मैं सुबह 10 बजे करीब उठा .. पूरा तरोताज़ा महसूस हो रहा था. नीचे जाकर मम्मी -पापा को रंग लगाया होली का आशीर्वाद लिया, फिर ऊपर आया तो पायल भाभी के पति ने मुझे रंग लगाया. हम गले मिले , पायल भी आ गयी . मैं उसे देखकर थोड़ा नज़रें चुरा रहा था . इस पर वो जालिम कातिलाना हंसी हँसते हुए आयी और मेरे चेहरे पर रंग लगाकर धीरे से कहने लगी – क्यों शर्मा रहे हो .. जब छोटी होली भाभी संग खेल ली .. तो अब बड़ी होली पर रंग नहीं लगाओगे जी ? मैंने उनके गालों पर गुलाल लगाया और अपने कमरे में चला गया . यहाँ मैं बता दूँ की मुझे बाहर जाकर होली खेलना पसंद नहीं है . 12 बजे करीब मेरे 3 पक्के दोस्त ब्लू की दारू की बोतल लेकर आये . हमने वो बोतल खोली .. चखने में गुजिया .. भुजिया थी . हम लोग हो गए शुरू .. हम तीनों ने पूरी बोतल ख़तम की और वो तीनों चले गए . अब मैं अपने कमरे में ही लेट गया . फिर दो बजे करीब भाभी ऊपर आयी … उनके हाथ में एक कटोरी था . भाभी कमरे के बहार कड़ी थी . मैंने उन्हें देखा .. तो लुंड खड़ा हो गया , साली डीप गले का कुरता पहने हुआ थी .. जो बहुत ज्यादा फटा हुआ था … पता नहीं किस रंग का था .. कियोंकि वो बहुत ज्यादा रंग में रंग हुयी थी .. उसके बाल खुले थे … चूतड़ों तक आ रहे थे . भाभी बोली अनुपम जी .. ये चिकन बनाया है … आपके लिए लायी हूँ .. अंदर आ जाऊं क्या ?
मैं – हां भाभी .. आओ न .. बहार कियों कड़ी हो . मैंने पी तो ली थी . . तो अब मैं अपनी फार्म में था .. शर्म तो जैसे माँ – छुड़ाने चली गयी थी . भाभी झूमते हुए अंदर आकर कटोरी टेबल पर रखकर मेरे पास बिस्तर पर बैठ गयी . मैंने कहा – क्यों भाभी .. भइआ ने तो पूरा रंग दिया आपको .. खूब होली खेली है ..
भाभी – अरे क्या बताऊँ .. वो तो सुबह से ही दारु पी रहे है .. अब होली खेलने का टाइम आया तो औंधे हो कर सो गए … अब रात को उठेंगे … तब तक तो होली ख़त्म हो जायेगी . मैं अरे तो आप को ये रंग किसने लगाया ? भाभी ने इतराते और इठलाते हुए कहा – ये तो पड़ोस वाली भाभी और उनके कई दोस्त भी आये थे … तो सुबह से सब रंग ही लगा रहे है .. पर जिसने कल रात को रंग लगाया था .. वो आज रंग लगाने में शर्मा रहा है ..
मैं – भाभी कहाँ खेल ली आपने रात को होली ?
भाभी मेरे लुंड पर हाथ रखती हुयी बोली – मुझे इतनी अनादि और खुद को इतने बड़े खिलाडी न समझो अनूप जी .. मेरी नज़र आप पर जब से है .. जब उस कुटिया पल्लवी के साहट तुम मज़े ले रहे थे ..
मैं – भाभी ठीक तो हो .. ‘p-v’ कर आयी हो क्या ?
भाभी – हाँ .. वो तो सो गए और तुम्हारे पास आकर कल रात की बात करनी थी .. तो मैंने भी दो -तीन पेग पटिआला वाले खींच लिए .. कल रात मेरे पास तुम भी तो पी कर आये थे .. है न ? मैंने सोचा भाभी को जब सब पता ही है तो खुलकर बात करते हैं . ‘भाभी सच कहूँ .. तो आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो .. आप को देखकर ही कुछ हो जाता है . कल रात जो भी हुआ आप की मर्ज़ी से हुआ .. है न ?’ भाभी हाँ जी जनाब .. हमारी मर्ज़ी से हुआ है सब .. किसी की हिम्मत नहीं जो बिना मेरी मर्ज़ी के मुझे छु ले . भाभी बातों -बातों में मेरी बेल्ट और ज़िप खोलकर पंत निचे सरका चुकी थी और हाथों से मेरा लुंड सहला रही थी .
मैं – भाभी कोई आ जाएगा .. जाओ पहले दरवाज़ा तो बंद कर दो और छत की तरफ का दरवाज़ा भी बंद कर दो . भाभी बाहर आ गयी .. दरवाज़ा बंद करके बाथरूम में होकर आयी और कमरे का दरवाज़ा बंद करके मेरे पास आयी और अचानक मेरे चेहरे पर ढेर सारा रंग मलने लगी . मैंने भी उन्हें जकड लिया और उठाकर बिस्तर पर पटक दिया . अगले ही पल मैंने उनके ऊपर चढ़कर उनके दोनों हाथ पकडे .. उँगलियों में उँगलियाँ फँसायी और उनके रेंज हुए होंठों पर अपने होंठ रख दिए और जो चूसना शुरू किया तो पूछो मत . दोनों ने दारू पी हुयी थी .. एक -दुसरे के होंठों को .. जीभ को .. बुरी तरह चूस रहे थे . मेरे मुंह में उसका जो रंग आ रहा था .. मैं उनके मुंह में ही थूक रहा था .. वो चाट रही थी . मैंने उनके गालों को .. कानों को .. गलो को .. हर जगह चूसा .. गर्दन पर जमकर काटा . जब कुरता को फटा देखा तो मैंने पुछा – भाभी ये फटा कैसे ? तो उन्होंने बोलै – मेरे ‘वो ’ दारू में धुत थे रंग लगते टाइम फाड़ दिया … मैंने भी उन्हें आँख मारी और चूचियों के बीच में हाथ डालकर ब्रा से लेकर कुरता पूरा नीचे तक फाड़ दिया . भाभी के मुंह से निकला – है जानू .. तुम पागल हो गए हो क्या ?’ मैंने उनकी सलवार का नाडा भी तोड़ दिया और सलवार खींच कर उतार दी . अगले कुछ पलों में मैंने अपने कपडे भी उतार दिए और भाभी के चूचे चूसने लगा . वो मेरा सर पकड़ कर चूचूं पर दबा रही थी .. वाह उसके चूचूं की चुसाई में क्या मज़ा था . अब भाभी ने मुझे लिटाया और धीरे से मेरा लुंड अपने मुंह में भर लिया . वो सिर्फ सुपाड़ा ही अंदर ले पा रही थी और सच कहूँ तो सुपाड़ा चूसने की कोशिश कर रही थी .. पर उनके चूसने के तरीके से मुझे कुछ मज़ा नहीं आ रहा था . तो मैंने उन्हें उठाया और उन्हें नीचे खड़ा करके बिस्तर पर झुका कर घोड़ी बनाया और पीछे से उनकी गीली छूट पर अपना लुंड रगड़ने लगा . वाह .. उनकी मलाई वाली छूट कितनी गीली थी .. जी हाँ उनकी छूट का नाम मैंने मलाई वाली छूट रखा हुआ था जो उन्हें भी पसंद आया ..
भाभी ने कहा – जानू अब तड़पाओ मत .. घुसेड़ दो .. अपना शेरू मेरी गुफा में ..
मैंने कहा – ले जानू .. ले .. और इतना कहते ही मैंने एक धक्का मारा और गीली मलाईदार छूट में लुंड फिसलता हुआ सीधा बछेड़ अणि से जा टकराया .. भाभी के मुंह से सिर्फ ‘उय्य्यी माँ .. मर्डर गयी ..’ इतना निकला और तुरंत बोली – छोड़ो जानू .. खूब जोर से .. आज मेरी छूट को खूब होली खिलाओ ..’ मैंने तेज़ -तेज़ झटके लगाने शुरू किये . ‘फच .. फच .. फच ..’ के साथ उसके मुंह से – आठ ओह्ह्ह .. हए मर्डर गयी .. ुईमा .. जोर से छोड़ो .. उसकी इन आवाज़ों से कमरा गूँज रहा था . नीचे गली में तेज़ आवाज़ में डी ज बज रहा था क्योंकि होली थी .. तो हमें कोई टेंशन नहीं थी . मैंने भाभी के लम्बे बाल पकड़ कर तेज़ -तेज़ धक्के लगाए .. ‘भाभी तेरी छूट आज फाड़ दूंगा .. ले साली और ले .. आठ ले .. आह ..’ यही सब चल रहा था की भाभी बोली – बस करो जान .. अब बस करो .. मैं झाड़ गयी हूँ .. मेरी छूट झाड़ गयी रे .. तूने मार दिया रे .. मेरी बहुत बुरी तरह झड़ी है .. छोड़ दे .. अब तेरे लुंड की रगड़ बर्दाश्त नहीं होती .. निकाल लो प्लीज ..’ ‘पर जान .. मेरा तो अभी झाड़ा ही नहीं है .. मैं क्या करून ?’ ‘मेरे मुंह में झाड़ लेना प्लीज .. ‘भाभी ने कहा . मेरे दिमाग में एक मस्त ख़याल आया की आज भाभी की मोती गांड भेदी जाए . मैंने कहा – हाँ भाभी .. निकाल तो दूंगा .. पर फिर गांड मारूंगा … वही अपना माल निकालूंगा . ‘पर मैंने तो आज तक नहीं मरवाई जानू ..’ भाभी बोली . ‘तो आज मेरी ख़ुशी के लिए मरवा लो ..’ मैंने लुंड छूट से बाहर निकाल लिया और उन्हें बाहों में भरकर बोलै – जानू .. मैंने आज तक किसी की गांड नहीं मारी .. तुम प्लीज गांड दे दो .. मैं बहुत प्यार से आराम से मरूंगा .. जणू प्लीज … भाभी राज़ी हो गयी – ठीक है .. पर आराम से ..’ मैंने उन्हें चूमा और बिस्तर पर उल्टा लेता दिया और वेसिलीन लेकर खूब साड़ी उनकी गांड में भर दी . फिर उसकी गांड में उंगली डाली .. भाभी थोड़ी कसमसाई – ुयी आराम से . .’ मैंने धीरे धीरे उंगली अंदर -बाहर की .. फिर दूसरी उंगली दाल दी और वेसिलीन अच्छे से गांड में अंदर तक भर दी . भाभी शांत लेती थी .. अब मैं अपनी पोजीशन में आया .. अपने लुंड पर भी वेसिलीन लगा ली थी . मैंने उनकी टाइट गांड पर लुंड रखा और भाभी ने डर कर कहा – आराम से करना जान .. मैंने कहा – ठीक है मेरी जान .. बस तुम थोड़ा दर्द सह लेना . मैंने लुंड उनकी गांड के छेड़ पर लगा कर हलके से अंदर घुसाया .. भाभी उछाल पड़ी – आउच .. आराम से .. मैंने कहा – ठीक है . मैंने भाभी की कमर को कसकर पकड़ लिया और उनकी टांगों पर अपने मुड़े हुए घुटने रख दिए और एक जोर का झटका देकर लुंड गांड की गहराइयों में उतार दिया . भाभी जोर से चिल्लाई – मर्डर गयई .. ीी … ीीी वो अपने दांत भींच कर चुपचाप तकिये में सर दबा कर रोने लगी . मेरा पूरा लुंड उसकी गांड में था . मैं उनकी पीठ सहला रहा था . ‘भाभी सॉरी .. अब सब ठीक है .. प्लीज आप रो मत .. ी लव यू जान ..’ करीब 5 मिनट में वो नार्मल हो गयी और बोली – जान .. तुम्हारे लिए सब करूंगी .. अब मैं ठीक हूँ .. तुम चुदाई शुरू करो . मैंने लुंड थोड़ा बाहर खींचा .. फिर अंदर किया . हए टाइट गांड का बजाना .. क्या मस्त था .. बता नहीं सकता .. छूट से 100 गुना ज्यादा मज़ा आ रहा था . मैंने धीरे धीरे उसकी गांड में धक्के लगाने शुरू कर दिए . बहुत ही ज्यादा मज़ा आ रहा था . भाभी ने पुछा – क्यों जी .. मज़ा आ रहा है आपको ? मैंने कहा – भाभी .. चुप रहो बस .. ये मज़ा मुझे भोगने दो .. वो हंस दी .. कहा – जी जनाब .. मेरी गांड छोड़ने का मज़ा लीजिये . मुझे गांड छोड़ते -छोड़ते 10 मिनट ही हुए होंगे की लुंड अकड़ गया और मेरा सारा लावा उनकी गांड में फुट गया. ‘पांच.. Pach..’ पूरा माल निकल गया . वो मज़ा अनमोल था .. वाह क्या मज़ा है गांड छोड़ने का .. आज मुझे महसूस हुआ की औरत की गांड देखकर ही लुंड अपने आप क्यों खड़ा ho जाता है क्योंकि गांड में जाकर ही लुंड को असली सुख मिलता है .

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