लाख बचायी चूत मगर … -2

जवान लड़की की देसी चूत चाटने की कहानी में पढ़ें कि उसके पापा के दोस्त ने कैसे उसे अपने चक्कर में लेकर उसकी बुर चाटी. वो खुद सेक्स करना चाहती थी पर डरती थी.

दोस्तो, मैं विक्की एक बार फिर से आप सभी का अपनी एडल्ट स्टोरी में स्वागत करता हूं।
इस कहानी के पिछले भाग
पापा के दोस्त की अश्लील हरकतें
में आपने जाना कि मेरी कॉलेज फ्रेंड की दोस्त कोमल कैसे अपनी चूत को बचाकर रखना चाह रही थी।

मगर सोहल जवान लड़की की देसी चूत की सील तोड़ने पर आमादा था।
एक बार कोमल के मां-पापा को 15 दिन के लिए जाना पड़ा और सोहल को मौका मिल गया और कोमल की चुदाई करने की उसने ठान ली।

उस रात सोहल कोमल के यहां सोने वाला था। मगर कोमल खुद को रूम में बंद होकर बचाने की जुगत में थी। वो सोहल का इंतजार करने लगी।

अब आगे जवान लड़की की देसी चूत की कहानी:

फिर उस रात जब सोहल आया तो कोमल ने उसका स्माइल के साथ स्वागत किया।
सोहल सोच रहा था कि ये आज नहीं बच सकती थी।

वो कोमल की ओर बढ़ने ही लगा था कि कोमल बोली कि आप पहले फ्रेश हो लो तब तक मैं खाना लगा देती हूं।
सोहल मान गया।

जैसे ही नहाने गया तो कोमल ने खाना टेबल पर रखा और अपने रूम में जाकर अंदर से दरवाजा बंद कर लिया।

जब सोहल ने नहाने के बाद उसके रूम को खटखटाया तो उसने अंदर से कहा- आप खाना खा लो अंकल, मैंने तो खा लिया है। मैं सो रही हूं।

उसकी इस बात पर सोहल हैरान रह गया।
उसे नहीं पता था कि कोमल ऐसा भी कर सकती है। वो कुछ न कर सका।

अगले दिन जब तक वो घर से चला न गया तो कोमल रूम से बाहर नहीं आई।

एक दिन उसका निकल गया। अब अगले दिन कोमल ने सोहल के आने से पहले सारा काम खत्म किया और घर का दरवाजा अंदर से लॉक नहीं किया।

जब सोहल आया तो उसे दरवाजा खुला हुआ मिला और कोमल अपने रूम में जा चुकी थी।
इस तरह से उस दिन भी सोहल का चारा नहीं चला।

अब सोहल को गुस्सा आने लगा।
तीसरे दिन उसने अपना दिमाग लगाया और वो अपने ऑफिस के समय से पहले ही कोमल के घर पहुंच गया।

उस वक्त तक कोमल ने खाना भी नहीं बनाया था।

आज वह साथ में खाने-पीने का सामान, पेन किलर, कंडोम आदि लेकर आया था ताकि कोमल का कोई भी बहाना काम न कर सके।
वह सीधा खाना लेकर कोमल के रूम में आ गया।

कोमल अब कुछ नहीं कर सकती थी। कोमल उठ खड़ी हुई। वो उससे दूर जाने लगी मगर सोहल उसकी ओर बढ़ने लगा।

वो धीरे धीरे दीवार के साथ आ सटी और सोहल ने उसके दोनों हाथों को दीवार के नीचे दबा लिया।
कोमल बोली- पहले खाना खा लो अंकल!

सोहल बोला- वो तो सब हो जाएगा। मगर मेरी एक बात सुन लो तुम। दो दिन तुमने मुझे उल्लू बना दिया। आज नहीं बना सकती। मुझे पता है कि तुम्हारे अंदर भी सेक्स करने की आग है। तुम्हें लंड चाहिए है। मैं तुम्हें देना चाहता हूं और तुम नखरे कर रही हो! जवानी का मजा लो रानी। अगर तुम भी इस पल को इंजॉय करना चाहती हो तो मेरा साथ दो। नहीं तो मैं तो करके रहूंगा। अगर यह तुम्हारा पहली बार होगा तो बहुत दर्द होगा और बहुत कष्ट होगा उसमें!

वो बोली- मैं आपकी बेटी जैसी हूं।
सोहल- हां, मगर बेटी नहीं हो।

इस बात से वह समझ चुकी थी कि यह छोड़ने वाला नहीं।
चूंकि कोमल कॉलेज में अपने ग्रुप के दोस्तों से सुन चुकी थी कि चुदाई में कितना आनंद होता है तो कहीं न कहीं इच्छा तो उसके मन में भी थी।

अब सोहल कोमल के बदन से बिल्कुल चिपक गया था। उसकी छाती कोमल की चूचियों से सट गई थी। उसका तना हुआ लंड कोमल की जांघ को छू रहा था।
अब कोमल ने सोच लिया कि उसके पास कोई चारा नहीं है और इस पल का मजा लेने में ही फायदा है।

सोहल ने कोमल के चेहरे को पकड़ा और उसके होंठों पर अपने होंठ रखने लगा।
कोमल ने भी अपने होंठ खोल दिये और दोनों एक दूसरे को किस करने लगे।
सोहल पर वासना का भूत चढ़ गया और कोमल को जोर जोर से चूसने लगा।

कोमल डर गई और छूटने की कोशिश करने लगी लेकिन उसकी मजबूत पकड़ से छूट नहीं पाई।

धीरे-धीरे उसका विरोध दबता चला गया और किस में भी अब वह धीरे-धीरे साथ देने लगी।

कुछ देर कोमल के होंठों को चूसने के बाद उसने उसकी टीशर्ट उतारी और उसकी ब्रा के हुक खोलने लगा।
अब कोमल को मजा आने लगा था।

सोहल ने कोमल को ऊपर से पूरी नंगी कर लिया और उसकी चूचियों को जोर जोर से पीने लगा।

ऐसा लग रहा था कि जैसे उसने जीवन में पहली बार किसी लड़की की चूची देखी हैं। कोमल को अब मजा आने लगा था। वो भी सोहल के सिर को सहलाने लगी थी।

सोहल के हाथ कोमल की चूचियों को दबाने लगे और दोनों के होंठ फिर से मिल गये।
अब वो दोनों एक दूसरे के मुंह में जीभ डालकर चूस रहे थे।

इधर कोमल भी जैसे अपने आप को सोहल के हाथों में समर्पित कर चुकी थी।

इधर सोहल सोच रहा था कि अभी तो 10-12 दिन बाकी हैं। इसको ऐसी लत लगा दूंगा कि ये आगे से खुद ही चुदने के लिए कहा करेगी।

सोहल ने अपना कमाल दिखाना शुरू कर दिया। वो कोमल की गर्दन पर इतने प्यार से चूमने लगा कि कोमल मदहोश होने लगी।

वो उसके सिर को बड़े प्यार से सहलाने लगी और खुद ही उसका मुंह अपने चूचों में ले गयी।

पहली बार कोमल की चूचियों को मर्द का मुंह लगा था।
वो इस आनंद से अब तक अन्जान थी इसलिए बार बार इसका लुत्फ उठाना चाह रही थी।

सोहल उसके निप्पलों पर ऐसे जीभ फेर रहा था जैसे किसी आईसक्रीम को चाट चाट कर पूरा स्वाद ले रहा हो।

एक चूची पर उसका मुंह था तो दूसरी चूची पर उसका हाथ।
एक चूची दबाता तो दूसरी को चूसता।

वह भी इसका पूरा आनंद ले रही थी। चूंकि कोमल का ये पहली बार था तो वह खुलकर कुछ नहीं बोल पा रही थी मगर उसके सिर को हाथों से सहलाते हुए ये जता रही थी कि इन चूचियों को और जोर से चूस लो।

अब नीचे से सोहल के हाथ कोमल की लोअर को नीचे करने लगे, वो उसकी पैंटी के ऊपर से वो उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा।

धीरे धीरे फिर वो उसके पेट को चूमते हुए नीचे गया और पैंटी के ऊपर से चूत पर एक किस दे दिया।

फिर उसने धीरे-धीरे पैंटी को अलग किया और देखा कि उसकी चूत झाँटों में छुपी हुई थी।
वह कोमल की मस्त चमकीले बालों वाली चूत देखकर उत्तेजित भी हुआ; उस पर हाथ फेरने लगा।

हाथ फेरकर फिर जैसे ही अपनी उंगली डालने लगा तो कोमल दोनों जांघों को भींचने लगी।
मगर सोहल बड़ा खिलाड़ी था, उसने उसके दोनों पैरों को थोड़ा सा अलग किया और चूत को बड़े प्यार से देखा।

चूत के बालों को अलग करके दोनों फांकों को भी गौर से देखा और जीभ निकालकर हल्के से छू दिया।

जीभ की नोक की छुअन को चूत पर महसूस करके कोमल के शरीर में करंट सा दौड़ गया।

जो बातें उसने अब तक दोस्तों से केवल सुनी थीं आज वो उसके साथ घटित हो रही थीं और उसे उन बातों को सुनने और उसका अनुभव करने में जमीन आसमान का फर्क महसूस हो रहा था।

सोहल ने अपनी जीभ निकाली और उसकी चूत को प्यार से एक बार चाट दिया; उसकी चूत का गीलापन अपनी जीभ से महसूस किया और अपनी जीभ का गीलापन उसकी चूत को भी महसूस करवाया।

अब सोहल उसे अपनी बांहों में उठाकर बिस्तर पर ले गया; बिस्तर पर ले जाकर आराम से लेटा दिया जैसे कि वो कोई फूल हो।

वह भी अपने कपड़े उतारने लगा और नंगा हो गया।

कोमल लंड को देखना चाह रही थी लेकिन शर्म के मारे उसने आंखों पर हाथ रख लिए।

सोहल बेड पर आ गया और धीरे से उसके हाथ हटाकर उसके होंठों पर होंठों को रख दिया. फिर बड़े प्यार से उसके होंठों को चूसने लगा; कभी उसके होठों को काटता तो कभी चूसता, कभी उसकी चूची दबाता।

यह सब करने से अब धीरे-धीरे उसकी चूत में खुजली सी मचने लगी थी मगर वो कुछ बोलना नहीं चाह रही थी।

अब एक बार फिर उसने कोमल की चूचियों पर मुंह लगा दिया और बूब्स को पीने लगा।

कोमल के होंठ वासना में अब खुल गये थे।
सोहल ने देखा और उसके मुंह में अंगूठा दे दिया।

कोमल के लिए हर अहसास पहली बार था। उसने लंड चूसने के बारे में सुना था लेकिन अंगूठे चूसने का नहीं पता था।

मगर कोमल को ये बहुत उत्तेजित करने वाला लगा।
वो सोहल के मोटे से अंगूठे को लॉलीपोप बनाकर चूसने लगी जैसे कि उसमें से रस निकल रहा हो।
इससे कोमल और ज्यादा गर्म भी होने लगी।

अब सोहल का हमला उसकी चूचियों पर तेज हो गया था। वो उसके निप्पलों को दांतों में लेकर काट देता था।
इस पर कोमल भी उसके अंगूठे पर दांतों का हल्का दबाव बना देती थी।

अब कोमल की चूत में जो हलचल हो रही थी वो उसको सहन नहीं कर पा रही थी। पानी पानी हो चुकी चूत की हलचल उससे बर्दाश्त नहीं हो रही थी।

वह उसके अंगूठे को अपने मुंह से निकालकर कंपकंपाते हुए स्वर में बोली- अ अ अंकल … अब नीचे बर्दाश्त नहीं हो रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे कोई कीड़ा रेंग रहा हो।

सोहल ने उसे और गर्म करने की सोची और उसकी चूचियों को पूरी जोर से दबाते हुए मुंह में लेकर बच्चे की तरह अंदर खींचने लगा।
कोमल तड़प गयी। वो नीचे से अपनी चूत को उठाकर सोहल के बदन से रगड़ने की कोशिश करने लगी।

उधर सोहल उसको ये अहसास दिलाना चाहता था कि उसकी बात को मना करके वो किस आनंद को खोने जा रही थी।
इसलिए वो अपनी पूरी ताकत उसको गर्म करके तड़पाने में लगा रहा था।

अब फिर से कोमल कहने लगी- बर्दाश्त नहीं हो रहा अंकल …
मगर सोहल भी अपनी धुन में लगा रहा।

जब वो कई बार कह चुकी तो उसने फिर कहा- नीचे कहां मेरी रानी?
इस पर कोमल शर्माने लगी।

उसने फिर पूछा- बता न मेरी जान … नीचे कहां?
कोमल न चाहते हुए भी बोली- चूत पर … नीचे मेरी चूत पर।

सोहल बोला- मगर चूत की जगह तो मुझे पता ही नहीं है।
फिर वो उसको चूमते हुए नीचे जाने लगा।

पेट पर चूमते हुए नाभि और फिर नीचे झांटों के पास जाकर उसको सूंघने लगा और बोला- आह्ह … यहां से बड़ी मस्त खुशबू आ रही है … यहीं पर होती है क्या चूत?

कोमल की आंखों में चुदाई की तड़प साफ देखी जा सकती थी।
वो सिसकारते हुए बोली- हां अंकल … प्लीज कर दो न कुछ … मैं नहीं बर्दाश्त कर पा रही हूं।

सोहल धीरे धीरे हाथों से झाँटों को हटाता गया और उसकी गुलाबी चूत फिर से दिखने लगी।

इस बार वह उंगली नहीं ले गया, इस बार सीधा अपने होंठों को वहां ले गया। उसकी देसी चूत से निकले हुए पानी को अपनी जीभ से चाटा जिसकी वजह से कोमल जैसे किसी दूसरी दुनिया में खो गई थी।

वो पागल हुई जा रही थी। उसके मुंह को चूत में दबाने लगी और खुद ही चटवाने लगी।

सोहल भी जीभ को नुकीली करके चूत में अंदर कर देता तो कोमल और तड़प जाती।
उसकी चूत पूरी टाइट थी और वह बस किसी तरह इसकी खुजली को अब शांत करवाना चाह रही थी।

वह बिल्कुल आनंद के समंदर में गोते लगाते हुए इसका आनंद ले रही थी।
उसने सोहल के हाथ पकड़े और अपनी चूचियों पर ले गयी और जोर जोर से उसके हाथों को अपने चूचों पर दबवाने लगी।

सोहल खुद भी उसकी चूचियों को जोर जोर से दबाते हुए उसकी चूत में जीभ से चोदता गया।
इतने में ही कोमल की चूत का पानी छूट गया।

सोहल के लिए यह प्रसाद के जैसा था; वो कुंवारी कोमल की चूत का सारा रस चाट गया।
कोमल जैसे बेसुध हो गयी थी।

अभी भी सोहल ने उसकी चूत को चाटना बंद नहीं किया।
वो टांगें खोले चूत को चटवाती रही और बेसुध ही रही।

धीरे धीरे कुछ देर के बाद फिर से उसकी देसी चूत में हलचल होने लगी।
सोहल का चूत चाटना जारी था।

अब वो फिर से गर्म होने लगी। वो उससे चोदने के लिए कहने लगी।

सोहल उठा और अपने लंड को हिलाते हुए बोला- इसे चूसना नहीं चाहोगी?
वो बोली- मैंने ये कभी नहीं किया है। बस सुना है कि बहुत गंदा होता है। मैं नहीं चूस पाऊंगी अंकल!

सोहल भी उसके मन की दशा समझ गया था। उसने सोचा कि पहले इसको तैयार करना होगा तभी ये चूसने के लिए राजी होगी।

वो कोमल के ऊपर आ गया और अपने लंड को उसकी चूत की फांकों पर रगड़ते हुए उसकी आंखों में देखने लगा।

आप जवान लड़की की देसी चूत की कहानी को अपना प्यार देते रहें।
मेरा ईमेल आईडी है
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जवान लड़की की देसी चूत की कहानी का अगला भाग:

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