लाख बचायी चूत मगर … -1

कॉलेज गर्ल सेक्सी कहानी में पढ़ें कि कैसे वो अपनी चूत को सुहागरात के लिए बचाकर रखना चाहती थी. लेकिन उसकी सहेलियां खूब चुदाई करवाती थी तो उसका मन …

नमस्कार दोस्तो, मैं विक्की एक बार फिर से आपका स्वागत करता हूं एडल्ट कहानी की इस वेबसाइट में अपनी एक और कहानी के साथ।
आप लोगों का बहुत-बहुत धन्यवाद जो मेरी पिछली कहानी
तन्हाई में मन बहलाने को चुत चुदाई
पर आपने अपनी कीमती राय दी।

इसी तरह अपनी कृपा बनाए रखें। बहुत से लोगों के मेल आये। कुछ को रिप्लाई भी किया, कुछ को नहीं कर पाया।

कुछ भाभियों ने भी मेल किए और एक दो ने मिलने की इच्छा भी जाहिर की। फिर मैंने उनसे बात भी की। मैं एक भाभी से मिलकर भी आया।

मुझे भाभियों से सेक्स करना अच्छा लगता है। खासकर मुझे 35 साल से ज्यादा की भाभियां पसंद हैं। मुझे उनकी चूत चाटने में बहुत मजा आता है।

35 साल पार की भाभियों के साथ सेक्स करने का अपना ही मजा है। वो खुलकर सेक्स करती हैं और मजा भी बहुत देती हैं। उनके साथ सेक्स करने में कोई परेशानी नहीं होती है। न नखरे करती हैं और खुद भी इंजॉय करती हैं।

उनको लंड चूसने में भी कोई परेशानी नहीं होती है। अगर किसी को होती भी है तो वो भी रिक्वेस्ट करने पर मान जाती है। भाभियों की चूत बहुत रसीली होती है। लंड को प्यार से संभालती है।

सबसे बड़ी बात यह कि सेक्स करने के बाद भी वो इज्जत से बात करती हैं। इसलिए मुझे भाभियों से सेक्स करना बहुत पसंद है। मुझे भाभियों की चूत में ही असली मजा मिलता है।

अब मैं अपनी आज की स्टोरी आपको बताता हूं कि जो कि मेरी निजी स्टोरी नहीं है। यह मेरे कॉलेज के टाइम की कहानी है। यह कहानी मेरी गर्लफ्रेंड की सहेली की कहानी है।

बहुत दिनों से दुविधा में था कि मैं इस कॉलेज गर्ल सेक्सी कहानी को लिखूं या नहीं। मगर फिर मैंने सोचा कि गोपनीयता का ध्यान रखकर कहानी लिखी जा सकती है। इसलिए मैंने इस कहानी को लिखने का फैसला किया।

कॉलेज टाइम में मेरी गर्लफ्रेंड थी। उसका चार पांच लड़कियों का ग्रुप था।
उसमें से तीन लड़कियां बहुत बड़ी चुदक्कड़ थीं और उसमें मेरी गर्लफ्रेंड भी थी।

दो लड़कियां थोड़ी शर्मीले स्वभाव की थीं।
दोनों में से एक तो बहुत चुदना चाहती थी लेकिन बहुत डरती थी और उसमें से दूसरी थी वो ये सोचती थी कि उसकी चूत पर केवल उसके हस्बैंड का ही हक है।
इसलिए वो अपनी चूत को अपने पति के लिए बचाकर रखना चाहती थी।

यह कहानी उसी लड़की है। उसे नहीं पता था कि जिस चूत को वो अपने पति के लिए बचाकर रख रही है वो पहले कोई और ही चोदेगा।

उस लड़की के मां-पापा जॉब में थे और सरकारी विभाग में अच्छे पद पर थे।
अक्सर उनको बाहर जाना पड़ता था। अगर कोई बड़ा काम आ गया तो 10 दिन या 15 दिन के लिए भी बाहर रहते थे।

उसके पापा का एक दोस्त था, वह बहुत बड़ा हरामी किस्म का आदमी था।
सिर्फ उसके मां-पापा के सामने बहुत अच्छा बनता था।
मगर वास्तव में अंदर से वो एक बहुत ही कमीना इन्सान था।

जब से यह जवान हो रही थी उसकी नजर इस लड़की पर बनी हुई थी।
मैं लड़की का काल्पनिक नाम कोमल रख देता हूं ताकि आपको कहानी पढ़ने में अधिक मजा आये।

कोमल 32 के साइज के चूचों वाली, 26 की कमर और 32 के कूल्हों वाली खिलती हुई कली के जैसी थी।
नई नई जवानी फूट रही थी उसमें।
इसलिए वह आदमी उसको किसी तरह चोदना चाह रहा था।

उसका नाम सोहल (काल्पनिक) था। उसने कोमल के माता पिता को अपने काबू में कर लिया था।
जब वो बारहवीं पास करने वाली थी उस वक्त कोमल की जवानी अपने चरम पर आ रही थी।
सोहल इसी वक्त उसकी चूत का भोग लगाना चाह रहा था।

इसी वजह से उसने अपनी योजना पर काम करना चालू कर दिया; कोमल के घर आना जाना और ज्यादा कर दिया; जानबूझकर उसे गले लगाता, उसके कंधों पर हाथ रख देता।

इस तरह से वो दिखा रहा था कि कोमल उसकी बेटी की तरह है।
वो सबकी नजरों में उसके बाप जैसा बना फिरता था।

मगर धीरे धीरे कोमल उसकी गंदी हरकतों को समझने लगी।
वो अब सोहल से दूरी बनाने लगी।

जब भी वो उनके घर आता तो वो उसके सामने जाने से बचती थी।
मगर फिर भी सोहल किसी न किसी बहाने से कोमल के पास चला ही जाता था।

एक दो बार कोमल ने अपने माता पिता को बताने की कोशिश भी उसकी हरकतों के बारे में मगर उसके माता पिता को कोमल की बातें उसका वहम लग रही थीं।
इसलिए उन्होंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया।

यहां अगर कोई माता-पिता इस कहानी को पढ़ रहे हैं, वो इस पर पर ध्यान दें कि अपने बच्चे पर हमेशा विश्वास करें.
और खासकर अगर आपका बच्चा किसी की शिकायत कर रहा है तो जिस व्यक्ति की शिकायत कर रहा है वह कितना भी विश्वसनीय क्यों न हो, अपने बच्चों की बात को सुनें जरूर!

एक दो बार शिकायत करने पर कोमल समझ गयी कि उसकी बात को कोई नहीं समझेगा इसलिए वो अब खुद ही सतर्क रहने लगी।

एक दिन की बात है कि कोमल घर में अकेली थी।

शाम का वक्त था। उसकी मां भी घर में नहीं थी। वो उस वक्त नहा रही थी।

सोहल उनके घर गया तो उसे कोई नहीं मिला।

फिर उसको बाथरूम से आवाज आई तो उसके शैतानी दिमाग ने काम किया।
उसने सोचा कि अच्छा मौका है इसलिए वो सीधा कोमल के रूम में चला गया।

कुछ देर के बाद कोमल नहाकर बाहर आयी।
सोहल को देखकर वो चौंक गयी।

मगर उसने हिम्मत करके उसका सामना किया और फिर उसको चाय पानी के लिए पूछा।
सोहल ने मना कर दिया।

अब कोमल उसको बाहर जाने के लिए भी नहीं बोल सकती थी इसलिए वो वहीं रूम में अपने बाल पौंछने लगी।

उसके गीले बालों के कारण उसका कमीज भी पीछे से गीला हो गया था और उसकी ब्रा की पट्टी भी दिख रही थी।

ये देखकर सोहल की हवस जाग गई।
वो उसके पास चला गया, बहाने से उसके कंधे पर हाथ रखकर सहलाने लगा।

जब उसकी हवस बढ़ती गई तो उसने पीछे से कोमल को पकड़ लिया और उसकी गर्दन पर किस करने लगा।

कोमल ने पहले तो मना किया लेकिन जब वो नहीं माना कोमल अलग हो गई।

वो बाहर जाने लगी तो उसने कोमल का हाथ पकड़ लिया और उसकी गांड पर लंड सटाकर फिर से उसकी गर्दन को चूमने लगा।

अब कोमल समझ नहीं पा रही थी कि उसको क्या करना चाहिए।
एक तरफ तो वो सोहल से नफरत करती थी मगर पहली बार उसके नारी तन को एक मर्द का स्पर्श मिल रहा था, उसका जिस्म गर्म होने लगा था. इसलिए वो दुविधा में पड़ गई थी कि उसे क्या करना चाहिए।

इधर सोहल अपना काम करता जा रहा था। उसका लंड खड़ा हो चुका था और कोमल की गांड पर सट गया था।
वो लगातार उसकी गर्दन पर चूम रहा था और कोमल उसे हटाने की कोशिश करते हुए भी कमजोर सी पड़ती जा रही थी।

उसकी गर्दन पर पड़ रहे सोहल के नर्म होंठों के गर्म चुम्बन उसके बदन में सिरहन पैदा कर रहे थे।
सोहल के हाथ अब धीरे धीरे कोमल के पेट को सहलाते हुए उसकी चूचियों के नीचे आ गये थे।

दोनों ओर से हाथ लाते हुए उसने कोमल की नव विकसित तनी हुई चूचियों को अपने हाथों में भर लिया।
जैसे ही उसने उन अमरूदों को दबाया तो कोमल ने उसके हाथ झटक दिये।

वह एकदम से आगे चली गयी मगर सोहल ने उसके कंधे से पकड़ कर उसे फिर पीछे खींच लिया।

उसकी पैंट में तना लंड एक नुकीला तंबू बना चुका था और उस तंबू की नोक को उसने कोमल की गांड के बीच में फंसा कर कसकर दबाव बना दिया।

कोमल को सोहल के कठोर लंड का अहसास अपनी गांड पर हो रहा था। एक बार फिर से सोहल के हाथों ने कोमल की चूचियों को जकड़ लिया और उनको दबाने लगा।

कोमल को अच्छा लगा रहा था पर वो अनजाने डर से कसमसाने लगी और कराहती हुई बोली- छोड़ दो अंकल, मैं मां को बता दूंगी।
वो बोला- कितनी बार बातएगी मेरी जान … बताकर देख लिया तूने … तेरी मां ने खुद मुझसे बात की थी इस बारे में … वो तेरी नहीं सुनेंगे … चुपचाप मजे ले ना मेरी रानी … तुझे इतना प्यार दूंगा कि तू दुनिया भूल जाएगी।

सोहल के हाथ कोमल की चूचियों को पूरी की पूरी भरकर दबा रहे थे। बीच में जब उसने चूची के केंद्र में हाथ ले जाकर देखा तो कोमल की चूचियों के निप्पल तन गए थे।

ये जानकर उसकी वासना और ज्यादा भड़क गयी। उसने अब सिर को आगे करते हुए कोमल के गालों को चूमना शुरू कर दिया। वो अपना मुंह हटाती रही। मगर सोहल फिर भी चूमता रहा।

कभी वो उसके पेट को सहलाता तो कभी उसकी गांड को भींच देता। कोमल कहीं न कहीं अंदर ही अंदर गर्म भी हो रही थी। मगर अभी उसकी चूत को पति के लिए बचाकर रखने की कोशिश ही उसके दिमाग में घूम रही थी।

अब सोहल से बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था। सोहल ने अपने लंड को कसकर उसकी गांड में सूट के ऊपर से ही धकेला और आगे से दोनों हाथ ले जाकर उसकी चूत को सूट उठाकर सलवार के ऊपर से ही पकड़ लिया।

उसकी इस हरकत को कोमल बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसने झटके उसके हाथ पीछे किये और उसको धक्का देकर बाहर भाग गयी।

सोहल उसके पीछे पीछे भागा लेकिन तभी दरवाजे के खुलने की आवाज हुई।

कोमल की मां घर में दाखिल हुई और उसने कोमल के चेहरे पर पसीना देखा।
वो बोली- क्या हुआ, तू ठीक है?
फिर उसकी नजर सोहल पर गई और वो बोली- अरे आप कब आये?

सोहल- बस आपके आगे आगे आया हूं भाभी जी।
कोमल ने सोहल की ओर देखा तो उसने आंखों में ही उसकी मां को कुछ भी न बताने का इशारा कर दिया।

फिर मौका पाकर सोहल ने कोमल को कहा- अगर तूने मुंह खोला तो बदनामी तेरी ही होनी है, सोच लेना।
अब कोमल ने भी चुप्पी साध ली।

उस दिन के बाद से सोहल कोमल को मौका पाकर कहीं से भी छू देता था।
वो कुछ नहीं बोल पाती थी।

सोहल उसके लिए कोई न कोई तोहफा भी ले आता था।
वो भी ले लेती थी क्योंकि वो किसी तरह का बखेड़ा नहीं चाहती थी।

धीरे धीरे दिन बीत रहे थे और कोमल सोहल के जाल में फंसती चली गई।
अब सोहल उसकी चूत का उद्घाटन करने के मौके की तलाश में था।

एक बार कोमल की मां को 15 दिन के लिए बाहर जाना पड़ गया। उसके पापा तो पहले से ही गए हुए थे। अब कोमल की मां सोचने लगी कि इसे घर में अकेली छोड़कर कैसे जाऊंगी।

शाम को जब सोहल उनके घर आया तो कोमल की मां ने उसे परेशानी बतायी।
इस पर झट से सोहल ने कहा- अरे भाभीजी, मैं किसलिए हूं। मैं रात में यहां पर आकर सोया करूंगा। अकेली लड़की को भला ऐसे घर में कैसे छोड़ सकते हैं।

कोमल की मां को सोहल पर पूरा भरोसा था इसलिए वो खुश हो गयी।
उसने कोमल को सोहल के भरोसे छोड़ने का फैसला कर लिया।

अगले दिन जब वो जाने लगी तो कोमल को तब उसने ये बात बताई।

मगर अब तक बहुत देर हो चुकी थी। कोमल अब इस बात के लिए मना नहीं कर सकी क्योंकि उसकी मां जाने के लिए तैयार हो चुकी थी। उसने भी सोच लिया कि जो होगा देखा जाएगा।

इस तरह कोमल घर में अकेली रह गयी। वो जानती थी कि वो नहीं बच पाएगी मगर उसके पास कोई चारा भी नहीं था।

वो शाम के बारे में सोचकर परेशान हो रही थी जब सोहल उसके यहां सोने के लिए आने वाला था।

फिर जब शाम होने को आयी तो उसके दिमाग में एक बात काम कर गयी।
उसने सोचा कि केवल वो रात को ही सोने आयेगा। अगर मैं अपने रूम से ही बाहर न निकलूं तो बात बन सकती है।

ये सोचकर उसने जल्दी से सारा काम खत्म कर लिया। उसने सोहल के आने से पहले ही खाना खा लिया और बर्तन वगैरह साफ करके किचन में रख दिये।

सोहल के लिए उसने खाना फ्रिज में रख दिया।
उसे नहीं पता था कि सोहल उसके यहां खाएगा या बाहर से खाकर आयेगा।
मगर वो सोहल को उसके पास आने का कोई मौका नहीं देना चाहती थी।

सोहल के आने से पहले उसने सारी तैयारी कर ली। अब वो बस ये सोच रही थी कि किसी तरह सोहल एक बार आये और वो उसके आते ही जल्दी से बचकर अपने रूम में बंद हो जाए।

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