बुटीक वाली सेक्सी भाभी के जिस्म का मजा- 5

Xxx हिंदी भाभी की चुदाई का मजा मुझे उसने अपने बुटीक में बुलाकर दिया. मैं अंदर गया तो भाभी ने दरवाजा बंद कर लिया और अपना गर्म जिस्म मेरे हवाले कर दिया.

फ्रेंड्स, मैं आपको माधुरी भाभी की चुदाई की कहानी सुना रहा था.
Xxx हिंदी भाभी कहानी के चौथे भाग
सेक्सी भाभी के जिस्म को छूने का मजा
में अब तक आपने पढ़ा था कि माधुरी ने मेरी पैंट को चड्डी समेत नीचे खींच कर उतार दिया था.

अब आगे Xxx हिंदी भाभी की चुदाई का मजा:

मेरा काला लंड एकदम से उछल कर ऐसे बाहर आ गया मानो किसी ने लंड में स्प्रिंग डाला हो.
मेरा लंड एकदम गीला हो गया था.

उसकी चमकती हुई चमड़ी देख कर माधुरी मेरे लंड से बोली- आज तुम्हारा कुंवारापन मैं खा जाउंगी.
यह कह कर उसने लंड को किस किया और उसको अपने मुँह में भर लिया.
वो आइसक्रीम की तरह लंड चूसने लगी.

मैं एकदम से मानो जन्नत में पहुंच गया होऊं, मुझे ऐसा लग रहा था.

माधुरी ने पहले मेरे लंड के टोपे को अपनी जीभ से चाटा, फिर मेरे लंड की गोटियों को भी अपने मुँह में लेकर चूस चूस कर खींचने लगी.
मैं आंखें बंद किए बस माधुरी की जुबान अपने गोटियों पर महसूस कर रहा था.

अब मुझे भी कुछ चाहिए था, इसलिए मैंने माधुरी से कहा- चलो न 69 करते हैं. मुझे भी चूत की मलाई खानी है.
माधुरी ने कहा- हां हां … क्यों नहीं, ये तो आज से तुम्हारी ही है.
ऐसा बोल कर वो उठ खड़ी हुई.

मैं भी नीचे ठीक तरह से लेट गया.
माधुरी की पैंटी और लेगिंग्स को मैंने अभी तक पूरा उतारा नहीं था, सिर्फ उन्हें जांघों तक नीचे करके मैं इतनी देर से उसे चूस रहा था, मसल रहा था.

फिर मैं भी माधुरी की लेगिंग्स को उसकी जांघों से नीचे खींचने लगा.
माधुरी बहुत ही सेक्सी कामदेवी लग रही थी और उसके बदन पर उसकी लेगिंग्स बहुत टाइट होने के कारण चिपकी सी थी.

मैंने उसकी लेगिंग्स खींच कर उतार दी और पैंटी को भी उतार दिया.

अब माधुरी मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी, उसके पैरों में पायल की खनखनाहट भरी आवाज साफ़ साफ़ समझ रही थी.

उसने मेरी तरफ पीठ करके मेरे मुँह पर अपनी चूत रखी और खुद मेरे काले लंड को लॉलीपॉप की तरफ चाटने लगी.
उसकी जीभ और होंठ दोनों मेरे लंड के टोपे को जोर जोर से ऐसे चूस रहे थे मानो मेरे लंड से दूध निकलने वाला ही हो.

वैसे ही अधूरी मेरे लंड मुँह में लेकर अपने गालों को भींच कर और अन्दर खींच रही थी.
उससे ऐसा लगा मानो मेरा लंड माधुरी की गर्म गर्म सांसों में ही अपने लावा छोड़ देगा.

मैंने भी माधुरी की चूत को देख कर पहले उसे सूंघा और अपनी नाक का नथुने उसकी चूत की फांकों के पास ले जाकर लम्बी सांस ली.
माधुरी के कामरस की खुशबू मुझे और भी ज्यादा नशा दे रही थी.

दोस्तो, आप लोगों को बता दूँ कि जो भी औरतें अपनी चूत हमेशा साफ़ रखती हैं और सेक्स की प्यासी होती हैं, उनकी चूत की खुशबू में ऐसा नशा होता है कि आपको असली जन्नत का मजा दिला दे. या कहूँ तो इससे नशीली और कोई खुशबू हो ही नहीं सकती.

मैंने अभी तक बहुत औरतों की चूत को सूंघा है, चाटा है, चूसा है. मैं अपने अनुभव से कह रहा हूँ कि मुझे चूत को चूसना बहुत ज्यादा पसंद है.
मैं चूत को चूसते चाटते समय औरत का रंग रूप नहीं देखता कि वो गोरी है या काली है, मोटी है या पतली है, मुझसे उम्र में बड़ी है या छोटी है.

मैंने सिर्फ इन सभी को यही कहा कि मैं पहले आपको नहलाता हूँ, साफ़ करता हूँ. फिर मैं आपको पैरों की उंगली से लेकर माथे तक चूसूंगा, चाहे वो आपकी बड़ी मोटी गांड का छेद हो या काली चूत हो. मुझे सिर्फ चूत साफ करने के बाद उसे चूसने में बड़ा मजा आता है.

ये सब मेरे पुराने पाठकों ने मेरी पिछली सेक्स कहानियों में पढ़ा होगा.

मैंने अपने दोनों हाथों से पहले माधुरी की बड़ी गांड को सहलाया, फिर उसकी चूत को किस करके गांड पर एक थप्पड़ मारा.
माधुरी के मुँह से ‘आह आ आउच हाय …’ निकला.

फिर मैंने अपनी जुबान को माधुरी की चूत के पंखुड़ियों पर चलानी शुरू कर दी.

उधर माधुरी भी मेरा काला मोटा लंड मजे से चूस रही थी.

मैं भी जोर जोर से उसकी चूत को चूस रहा था.

बीच बीच में माधुरी मेरे लंड को मुँह से निकाल कर बोलती- आह और जोर से चूसो मेरे राजा … ओह आउच … हाय … और अन्दर तक डालो … पूरी चूत का पानी निचोड़ डालो … आह बड़ा मस्त चूसते हो तुम.

माधुरी उस वक़्त मेरे लंड अपने हाथों में लेकर अपने होंठों पर लंड को मारती, अपने गाल से लंड को सहलाती और कभी कभी मेरे लंड के टोपे को चूसती.

मैं उसकी इन मादक हरकतों से सातवें आसमान पर उड़ रहा था.
ऐसे ही जोश में मैं माधुरी की चूत चूस रहा था.

तभी मुझे लगा कि मेरा माल अभी निकलने वाला है.

मैंने भी माधुरी की चूत को पूरा मुँह में भर लिया और उसे जोर जोर से अपने मुँह में लेकर अन्दर बाहर करने लगा.
उधर शायद माधुरी को भी पता चल गया था कि मेरा लंड अब पानी छोड़ेगा क्योंकि मेरे लंड की गोटियां से लंड का लावा आते वक़्त माधुरी भी महसूस कर रही थी.

उसने मेरे लंड पूरा अन्दर गले तक भर लिया और मेरे लंड की गोटियां दबाने लगी.
बस उसी वक्त मेरे लंड के सब्र का बांध टूट गया और मैंने चिल्लाते हुए ‘आहा … आ आ … ले साली आह चूस ले आहा …’ करते हुए अपना सारा लावा माधुरी के गले में ही छोड़ दिया.

माधुरी भी मेरे वीर्य की एक एक बून्द गटक गयी और साथ ही साथ उसकी चूत ने भी रुक रुक कर मेरे मुँह में अपने गर्म गर्म रस को छोड़ना शुरू कर दिया था.

उसकी चूत से उसका बहुत सारा रज रुक रुक कर अन्दर से बहता हुआ मेरे होंठों के नीचे मेरी ठुड्डी से मेरे गले तक बह रहा था.

उसका चुतरस बहुत ही ज्यादा खट्टा नमकीन सा लग रहा था.
उधर माधुरी भी मेरे लंड को चूस चूस कर साफ़ कर रही थी.

फिर वो मेरे ऊपर से उठ गयी और उसने मेरी तरफ देखा, तो मेरे मुँह पर बहुत जगह पर उसका गाढ़ा सफ़ेद चूत रस लगा हुआ था.

उसने मुझसे कहा कि आज तक कभी भी मेरे पति ने मेरी चूत इस तरह से नहीं चूसी, तुम सच में बहुत अच्छे से चूत को चूसते हो, इसलिए शायद शादी के छह साल बाद पहली बार मेरी चूत ने इतना सारा रस छोड़ा है. सच में मुझे आज बहुत ही ज्यादा संतुष्टि हो रही है.

मैं उसकी तरफ देख कर मुस्कुराने लगा.

अब माधुरी ने उठ कर अपने बैग से टिश्यू पेपर निकाला और मेरे मुँह को साफ कर दिया, साथ ही साथ अपने मुँह को भी उसी से पौंछ लिया.

फिर उसने मुझे अपने होंठों से किस करना शुरू किया.
माधुरी के मुँह से मेरे वीर्य का और मेरे मुँह से माधुरी के चूतरस का खट्टा टेस्ट आ रहा था जो हम दोनों को किस करते समय एक दूसरे को आ रहा था.

साथ ही साथ हमारे कामरस की गंध इतनी मदहोश करने वाली थी कि उसने नशे से हम दोनों बेहद आवेश में आ गए थे.

हम एक दूसरे को किस कर रहे थे, एक दूसरे के होंठों को काट रहे थे, चाट रहे थे.
ऐसे ही हम दोनों फिर से एक दूसरे के नंगे बदन को सहलाने में मस्त हो गए.

मैंने माधुरी को अपना लंड चूसने को कहा.
माधुरी भी बिना देरी किए मेरा लंड चूसने में लग गयी और मैं उसकी चूत में उंगली डाल कर जोर जोर से अन्दर बाहर करने लगा.

कुछ ही मिनट के बाद मेरा लंड वापस अपने असली रूप में आ गया.

मैंने देखा कि माधुरी की चूत भी लबालब हो कर बहने लगी थी और साथ ही साथ उसकी गर्म सिसकारियां निकल रही थीं.

मुझे समझ आ गया कि यही सही वक़्त है जब मुझे अपने काले लंड को माधुरी की चूत में डाल देना चाहिए.

मैंने माधुरी से कहा कि मैं कंडोम नहीं लाया. मुझे नहीं पता था कि मेरी भूख ऐसे शांत होगी.
माधुरी ने कहा- कोई बात नहीं, मैं गोली ले लूंगी. तुम बिना कंडोम के ही मुझे चोदो. मैं भी तुम्हारा गर्म वीर्य अपनी चूत में महसूस करना चाहती हूँ.

मैंने कहा- ठीक है, तुम अब तुम लंड पर बैठ जाओ.
माधुरी ने हां कही और वो मेरे लंड पर बैठने के लिए खड़ी हो गयी.

मैं नीचे गद्दे पर ठीक से लेट गया.
फिर माधुरी ने मेरे लंड को पकड़ा और अपनी चूत पर सैट कर लिया.
धीरे धीरे वो लंड पर बैठने लगी.

उस समय मैं सही में सातवें आसमान पर था क्योंकि माधुरी की चूत में मेरा लंड बिल्कुल सीधा घुस रहा था.

ऐसा लग रहा था कि जैसे माधुरी की चूत की दीवारें मेरे लंड की चमड़ी को उधेड़ कर रख देंगी.
फिर जब माधुरी मेरे लंड पर पूरी तरह से बैठ गयी, तब तो मैं मानो जन्नत में पहुंच गया था.

मैंने माधुरी को आगे झुकने का इशारा किया क्योंकि मैं अब उसकी चूचियां मुँह में भर कर उसका रसपान करना चाहता था.
माधुरी भी मेरे ऊपर झुक गयी.

मैंने उसकी एक चूची मुँह में भर ली और दूसरी को अपने हाथ में लेकर दबाने लगा.
उधर नीचे से वो मेरे लंड की सवारी कर रही थी, मैं भी नीचे से मेरी कमर हिला कर उसकी चूत में अपना लंड और अन्दर डालने में सहयोग कर रहा था.

माधुरी चूची चुसवाती हुई बोल रही थी- आंह … और चूसो इन्हें पूरा खाली कर दो. मेरे दूध को जोर से चूसो मेरे राज … ओह … आउच … काटो काटो मेरे निप्पल को काटो आह जोर से चूसो मेरे राजा … ओह.

ऐसे ही करीब पांच मिनट तक मैं उसकी चूचियां चूसते चूसते उसको अपने लंड पर कुदवाता रहा.
वो भी मजे से चुदते चुदते अपनी चूचियां चुसवा रही थी.

फिर मैंने उससे घोड़ी बनने को कहा.
वो मुझे एक लम्बी किस करके मेरे ऊपर से उठ गयी और जल्दी वो गद्दे पर घोड़ी कर तरह झुक गयी.

मैं उठ कर खड़ा हुआ और उसकी बड़ी गांड को सहलाने लगा. उसकी गांड के छेद पर किस करने लगा, उसे सूंघने लगा.
मैं माधुरी की गांड के दोनों कूल्हों को पकड़ कर उन्हें आपस में दबाने लगा और कूल्हों को छोड़ कर एकदम से उसकी गांड में मुँह लगा कर चाटने लगा.

मेरी इस हरकत से माधुरी ने कुलबुलाते हुए कहा- तुम तो बड़े ही अनुभवी लगते हो, तुम्हारी बीवी बहुत भाग्यशाली होगी क्योंकि चुदाई की कला में तुम तो बहुत ज्यादा एक्सपर्ट हो. मुझे नहीं पता था कि तुम इतना अच्छे से मेरी चूत की आग को शांत कर सकोगे. सच में तुमने तो पहले ही दौर में मेरी संतुष्टि कर दी. और अब तो तू मेरी गांड को ऐसे मार कर, चूस कर, सूंघ कर मेरी कामाग्नि और भड़का रहा है.

मैंने भी उससे कहा- हां क्योंकि मेरी बीवी है ही इतनी कमाल की कि आज मुझे उसके साथ पोर्न मूवी में दिखने वाले सारे आसान करने हैं और उसको इन आसनों के जैसे ही चोदना है.

माधुरी ने पीछे मुड़कर मेरी तरफ देखा और कहा- बीवी?
मैंने कहा- हां, अभी थोड़े देर पहले ही तो तुमने कहा था न कि हम दोनों शादी कर लेते हैं, तो अभी तो हमारी शादी भी हो गयी है न!

ये सुनकर माधुरी भी हंसने लगी- हां … पर मुझे ये नहीं मालूम था कि मेरा पति इतना धाकड़ चोदू निकलेगा.
मैंने हंसते हुए माधुरी की चूत को थोड़ा चौड़ा किया और उसमें झटके से एक उंगली डाल दी.

माधुरी झट के से ‘आउच इस्स … आह मर गई …’ कहती हुई उठी.

तभी मैंने अपना लंड पकड़ा और माधुरी की चूत में डाल कर उसे अन्दर धकेलने लगा.
माधुरी भी अपनी गांड को मस्त सहलाते हुए मेरा लंड अन्दर ले रही थी.

फिर मैंने धीरे धीरे लंड को पूरा अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया.
माधुरी भी पूरी मस्ती से चुदवा रही थी.

कुछ मिनट के बाद माधुरी भी मादक आवाजों में चिल्लाने लगी- आह राजा … मजा आ गया … और जोर से चोदो मेरे राजा … और अन्दर तक पेलो … आह … हम्म … हां हां … ऐसे ही पेलो.
वो कामुक सिसकारियां लेने लगी.

मैं भी उसकी ऐसी आवाजों से और जोर से चोदने में लग गया.
अपने लंड बाहर निकालता और पूरी ताकत से अन्दर तक घुसेड़ देता.

माधुरी चीखे जा रही थी- आह ऐसे ही मेरी जान … आह.
मेरी दोनों जांघें माधुरी की गांड से टकरा कर थप थप की आवाज पैदा कर रही थीं.

मेरी जांघें जब भी माधुरी की गांड को धक्के देतीं तो उसकी गांड ऐसे उछलती मानो हवा से भर गुब्बारे उछल रहे हों.

ऐसे ही पंद्रह बीस मिनट की चुदाई के बाद मेरा लंड अब किसी भी वक़्त अपने लावा छोड़ने वाला था.

मैंने माधुरी से कहा- मेरा होने वाला है.
माधुरी ने कहा- मेरा तो दो बार हो भी गया लेकिन अगर तुम जोर जोर से करते रहोगे तो मेरा फिर से हो जाएगा. मैं भी तुम्हारे साथ आना चाहती हूँ … तुम जोर जोर से चोदो मुझे … आंह पूरा अन्दर मेरी बच्चेदानी तक लंड घुसाओ.

उसके मुँह से ऐसा सुनते ही मैं भी जोर जोर से उसे पेलने लगा और उसकी गांड पर झापड़ मारने लगा.
बस कुछ एक मिनट में ही मेरे लंड का लावा छूटा और साथ ही साथ माधुरी का बदन भी अकड़ने लगा.
हम दोनों साथ साथ झड़ गए.

मैं हांफते हुए पीछे से माधुरी की पीठ पर निढाल होकर गिर गया.
माधुरी भी मस्ती में अपनी गांड झुला कर हांफने लगी थी.
हम दोनों पसीना पसीना हो गए थे.

फिर मैं माधुरी के ऊपर से हटा और वहीं नीचे गद्दे पर लेट गया.
माधुरी उठी और उसने फ़ौरन टिश्यू पेपर से अपनी चूत से टपकता वीर्य साफ़ किया और मेरे लंड का वीर्य भी साफ़ कर दिया.

वो मेरे बगल में लेट गयी और बोली- तुम्हारी चुदाई से बहुत खुश भी हूँ और इम्प्रेस भी हूँ.
मैंने कहा- क्यों ऐसी क्या ख़ास बात हुई? तुम्हारा पति भी तो तुम्हें चोदता है न!

उसने कहा कि मेरा पति महीने में 3-4 बार ही करता है और वो भी एक ही बार चोद कर सो जाता है. ठीक तरह से चूत भी नहीं चाटता और एक बार लंड से पानी निकला, फिर उसकी बैटरी फुक जाती है और वो बस सो जाता है.

मैं समझ गया कि माधुरी की चूत गधे के लंड से चुदना चाहती थी और उसे झान्टू किस्म का लंड मिल गया है.
माधुरी अपनी ही धुन में बताती जा रही थी- फिर मैं उठ कर बाथरूम में आ जाती हूँ और उंगली से अपने आपको शांत कर लेती हूँ.

माधुरी के चेहरे पर संतोषी के हाव भाव साफ़ साफ़ झलक रहे थे कि वो बहुत खुश थी.

उसने कहा- आज तुमने मेरे जीवन में प्यार का जो रस डाला, उससे मैं निहाल हो गयी हूँ. मैं तुम्हारी चूत चुसाई से भी मैं बहुत ज्यादा प्रभावित हूँ. मैं तुम्हें कुछ देना चाहती हूँ.

मैंने उसकी तरफ सवालिया नजरों से देखा.
उसने कहा- तुम मेरी तरफ से नए कपड़े ले लो.
मैंने कहा- नहीं मुझे कुछ नहीं चाहिए बस तुम्हारी गांड मारना चाहता हूँ.

उसने मुस्कुरा कर कहा- अब तो मैं तुम्हारी बीवी हूँ, मेरा सब कुछ तुम्हारा है.

मैंने उसे एक किस किया और हम दोनों जब अलग हुए तो उसने देखा कि चार बज चुके थे.

उसने कहा- आज गांड नहीं, फिर कभी ले लेना. घड़ी देखो, तुम दो बजे आए थे, तब से शॉप बंद की है. अब चार बजे गए हैं. सब शॉप वाले अपनी शॉप खोले होंगे और मेरी अकेली शॉप बंद दिखेगी, तो शक हो जाएगा. अभी गांड नहीं, फिर कभी. मैं तुम्हें बुला लूँगी.

मैंने उससे नाराज होते हुए कहा- अभी तुमने कहा था कि तुम जो चाहे वो मांग लेना, मैं दे दूंगी … और अभी तुम कह रही हो कि नहीं.
माधुरी ने मेरे पास आ कर मुझे गले लगा कर कहा- अरे मेरे राजा, अभी नहीं कहा है, पर बाद मैं तो दूंगी ही न. अभी मेरी तकलीफ समझो और कुछ अभी चाहो तो मांग लो मैं मना नहीं करूंगी तुमको, बोलो क्या चाहते हो?

मैंने उससे कहा- सच बताऊं तो मैं हमेशा से ही अलग अलग औरतों को चोदना चाहता हूँ. मुझे हर बार नयी चूत चोदने का मन करता है.

माधुरी ने मेरी बात सुन कर कहा- ओके मैं हूँ न … मुझे तुम जितना चाहे चोदो, जैसे चाहे चोदो. मैं मना नहीं करूंगी.
मैंने कहा- हां वो तो तुम हो ही, लेकिन ये मेरी इच्छा है कि तुम्हारी किसी सहेली को भी चोदूं. अपनी किसी सहेली को पटाओ न … उसे मुझसे चुदवाने के लिए सैट करो.

कुछ देर सोचने के बाद उसने कहा- ठीक है, मैं कुछ देखती हूँ.

मैंने खुश होकर उसके होंठों पर अपने होंठ रखे और उसे किस करने लगा.
माधुरी भी मदहोश होकर मेरे होंठों को चूसने चूमने लगी.

एक मिनट के बाद हम दोनों अलग हुए और दोनों कपड़े पहनने लगे.
फिर माधुरी ने कहा- तुम यहीं अन्दर रुको अभी … बाद में जब मैं कहूँ तब निकलना.

उसने शॉप का शटर ऊपर किया और बाहर आ कर माहौल देखने लगी.
कुछ मिनट के बाद वो अन्दर आकर बोली- अब कोई दिक्कत नहीं है, तुम आराम से बाहर जा सकते हो. बाहर देखने वाला कोई नहीं है. मैं तुम्हें जल्दी ही पूरे दिन के लिए बुलाऊंगी और अपनी गांड तोहफे में दूंगी.

मैं बहुत खुश हुआ और उसकी दुकान सी सीधा निकल कर ऑफिस चला गया.

दोस्तो ये था मेरी Xxx हिंदी भाभी की चुदाई का मजा!
आप सबको कैसी लगी, मुझे मेल करके जरूर बताएं.
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