बारिश में दोस्त के साथ सेक्स के मजे लिए

मेरा नाम नरेश हे और मैं एक MNC में काम करता हूँ |मेरी एक बहुत पुराणी और अच्छी दोस्त थी जिसका नाम कल्पना था और वो मुझसे एक साल छोटी थी | हम दोनों एक दूसरे से बहुत खुलके बात करते थे यहाँ तक की एक दिन मैं उसके लिए विस्पर भी लाया था कॉलेज में | दों साल हम मिले नही थे तो एक दिन उसने मुझसे मिलने को कहा और हम दोनों मिले और बहुत सारी बातें की और फिर घर को निकल पड़े | घर जाते जाते रात बहुत हो चुकी थी और अचानक बारिश भी होने लग गयी | हम दोनों छुपने के जगह देख ही रहे थे की हमे पास में एक छोटा सा लोज जेसा दिखा और हम उसी में चले गए | वह पे कोई कमरा खली नही था सिर्फ एक सिंगल कमरा था, हमने उसी को बुक कर लिया और फिर हम दोनों कमरे में चले गए | बारिश बंद हुई या नही ये देखने के लिए हम बालकोनी में गए तो देखा बारिश हो रही थी और ठंडी ठंडी हवा भी चल रही थी | वो मुझसे चीपक गयी और बोली बहुत ठंडी हे, मैं उसके बाजू पे हाथ फेरने लगा और फिर उसके बाद जो हुआ हम दोनों को नही की कैसे हुआ |

हाथ फेरते फेरते मेने उसे अपनी तरफ घुमा लिया और ठंडी के कारण हम दोनों एक दूसरे से चिपक गए और फिर मेने उसको किस किया गला पे और उसने भी मुझे किया | फिर धीरे धीरे हम दोनों एक दूसरे को यहाँ वह चूमने लगे और फिर होठ एक दूसरे से चिपक गए | हम दोनों एक दूसरे के होठो को मस्त वाला चूसने लग गए, इतने में मेने उसे गोदी में उठा लिया और फिर बिस्तर पे लेटा दिया और उसके उपर चड गया | वो मुझे कुछ भी नही बोल रही थी और बस मुझे सब कुछ करने दे रही थी | मेने उसके टॉप को उतार दिए और अपनी शर्ट उतार दी और फिर उसके उपर लेट गया | अब हम दोनों के गर्म जसीम एक दूसरे को छू रहे थे और मस्त मजा आ रहा था | मैं उसके होठो को चुमते चुमते उसके चुचो पे आ गया और उसके ब्रा के उपर से ही काटने लग गया, वो एक दम से सिसकिय भरने लग गयी और मेरे बालो को नोचने लग गयी | मेने उसके ब्रा को उतार दिया और उसके दोनों मम्मो को मसलने लग गया और फिर बारी बारी से उसके निप्पल चूसने लग गया |

मैं कुछ देर चूसने के बाद उठ के अपने कपडे उतार दिए और उसकी जींस उतार दी और साथ में पेंटी भी | उसकी गुलाबी चुत देख के मैं उसका दीवाना हो गया और फिर मेने उसके जांघों से उसको चूमना शुरू किया और फिर चुमते चुमते उसके चुत पे आ गया और फिर उसके चुत को चाटने लग गया, वो जोर जोर से कराहने लग गयी | वो अजीब तरीके से तड़पने लग गयी और फिर मैं उसके टांगो को घुटनों से मोड के उपर की तरफ किया और उसके उपर कद गया और न जाने कब मेरा लंड उसकी चुत में चला गया और वो एक दम से चीख उठी | मैं पहले डॉ गया पर फिर ध्यन आया की शयद अंदर चला गया होगा, मैं वही रुक गया और फिर लंड निकाल के फिरसे अंदर दे दिया | वो फिर से चिल्लाई पर तिन चार बार अंदर बहार करने से उसका दर्द उसे मजा देने लग गया | वो प्यार भरी आवाज़ में कराहने लग गयी और मुझे अपने से कसने लग गयी | एक दम प्यार भरा माहोल था और फिर हम दोनों झड गए | ऐसा लगा झड़ने के बाद जेसे किसी ने हमे मीठे सपनो में से जगा दिया हो |

झड़ने के बाद भी हम दोनों एक दूसरे से चिपके रहे और एक दूसरे को चुमते रहे | बारिश रुक चुकी थी पर हम उठे नहीं और अगले दिन सुबह घर गए और सारी रात एक दूसरे को प्यार करते रहे |

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