कुंवारी मौसेरी बहन की चूत चुदाई-2

मैं अपनी मौसेरी बहन को एक परीक्षा दिलाने ले गया था. वहां गलती से मैंने वियाग्रा खा ली. मेरा लंड खड़ा हो गया जो शांत नहीं हो रहा था. तो हमने क्या किया?

मेरी बहन की चुदाई की सेक्सी स्टोरी के पहले भाग
कुंवारी मौसेरी बहन की चूत चुदाई-1
में आपने अभी तक पढ़ा कि मैं अपनी मौसेरी बहन को एक परीक्षा दिलाने ले गया था. वहां गलती से मैंने वियाग्रा खा ली. मेरा लंड खडा हो गया जो शांत नहीं हो रहा था.

>उसने मेरे को वो रैपर दिखाया. तो मैं सारा मामला समझ गया. क्यूंकि वो गोलियां वियाग्रा की गोली थी … वो भी दो गोली मैंने खाई थी.
मीनू ने मेरे को कहा- भाई, मैंने शायद गलती से ये वाला पैकट उठा लिया. ये उन कपल का है जो स्टोर पर खड़ा था. वो ये गोलियां ले रहे थे और मैं इसलिए ही हंस रही थी.

तो उसने मेरे को वो रैपर दिखाया. तो मैं सारा मामला समझ गया. क्यूंकि वो गोलियां वियाग्रा की गोली थी … वो भी दो गोली मैंने खाई थी.
मीनू ने मेरे को कहा- भाई, मैंने शायद गलती से ये वाला पैकट उठा लिया. ये उन कपल का है जो स्टोर पर खड़ा था. वो ये गोलियां ले रहे थे और मैं इसलिए ही हंस रही थी.< मैंने कहा- अब क्या होगा? तभी मीनू ने अपनी किसी नर्सिंग वाली दोस्त तरुणा को फ़ोन करके सारा मामला बताया. तरुणा ने कहा- साली कुतिया ... तुमने देखा नहीं किस चीज की गोलियां हैं. अब उनकी वजह से तेरे भाई को लंड दो तीन घंटे तक खड़ा रहेगा और लंड में तब तक दर्द रहेगा जब तक लंड से वीर्य नहीं निकलता. ब्लड प्रेशर बहुत हाई हो जाता है. जिसके कारण कुछ भी हो सकता है. अपने भाई को जल्दी से अपने हाथ से मुट्ठी मरने के लिए बोल. मीनू ने बहुत ही शर्माते हुए मेरी तरफ देखा और मुझसे कहा- भाई, प्लीज आप हाथ से कर लो. नहीं तो आपको बहुत प्रॉब्लम हो सकती है. मैंने कहा- पागल है क्या? मैंने तो आज तक हाथ से नहीं किया. मीनू ने लगभग गिड़गिड़ाते हुए कहा- भाई, आज आपको अपना लंड हिलाना ही पड़ेगा. मेरी गलती की वजह से! मैंने मीनू के मुख से मैंने पहली बार लंड सुना था. लेकिन मेरा लंड फटा जा रहा था. उस कमरे मैं कोई बाथरूम भी नहीं था और जब हमने बाहर चेक किया तो वहां बाथरूम को लॉक लगा हुआ था. मैं वापिस अन्दर आ गया. मीनू ने मुझ से पूछा- क्या हुआ भाई? मैंने कहा- बाथरूम बंद है. तभी उसकी नजर मेरे लोअर पर गई जिसमें से मेरा आठ इंच का लंड साफ नजर आ रहा था. फिर उसने कहा- अब क्या होगा? तो मैंने कहा- मेरे को अब यहीं पर सब कुछ करना पड़ेगा. उसने भी कह दिया- हाँ भैया, आप यही कर लो. बाहर तो बहुत सर्दी है. मैं दूसरी तरफ मुंह कर लूंगी. मैंने कहा- ठीक है. मैंने अपना लंड बाहर निकला और मुठ मारने लग गया. मेरे मुख से आवाज निकल ने लगी- आह ... आ ... ह ... लंड ... आह ... आ ... ह ... हा ... हा ... हा ... अह ... हा ... अह ... हाय ... लंड लंड ... आह ... लंड ... लंड ... लंड ... हा ... हा ... हाहा ... हा ... हा..आ ... ह! और साथ में हाथ के घर्षण के करना मेरा लंड भी शुष्क हो गया और मुझ तकलीफ होने लगी. तो मैंने मीनू को आवाज दी. तो उसने मेरी तरफ देखा और कहा- क्या भाई? मेरे लंड को देख कर वो घबरा गई. मैंने कहा- तेरे पास तेल है न ... मेरे को जल्दी दे. उसने तेल की शीशी मेरे पास आकर दी तो नजदीक से मेरे लंड को देखा ... जो एकदम कुतुबमीनार की तरह खड़ा था. तीस मिनट बाद मेरे दोनों हाथ दुखने लगे तो मैंने कहा- अब मुझ से नहीं हो रहा ... मेरा लंड फटने को हो रहा है. तभी मैंने मेरी बहन को कहा- मीनू प्लीज ... हेल्प कर! उसने कहा- कैसे? तो मैंने कहा- अब तुझे तेरे हाथ से करना पड़ेगा. उसने एक बार तो मना किया. फिर मेरे स्थिति को देखा और मेरे पास आ गयी। मैं एकदम नग्न था. फिर मीनू ने अपने कोमल हाथ से मेरे लंड को पकड़ा और उसे मुठियाने लगी. उसकी नजर नीचे थी और अपना हाथ मेरे लंड पर चला रही थी. बीस मिनट के बाद भी मेरे लंड ने वीर्य नहीं छोड़ा और उसके भी कोमल हाथ दुखने लगे. तभी उसकी सहेली का फ़ोन आया और अबकी बार फ़ोन मीनू ने स्पीकर मोड में कर दिया और उसका दूसरा हाथ मेरे लंड पर चल रहा था. "मीनू ... हुआ तेरे भाई का लंड शांत?" मीनू ने कहा- चालीस मिनट हो गए, नहीं हो रहा ... भाई के हाथ दुखने लगे और मेरे भी! तरुणा- क्या तू अपने भाई के लंड को मुठिया रही है? मीनू ने कहा- और क्या करूं? भाई की हालत खरब हो रही है. तब तरुणा ने कहा- मैं चाहती तो नहीं पर अब एक ही रास्ता है ... देख ... एक लड़के का लंड ... किसी भी लड़की के शरीर को देख कर जल्दी झड़ जाता है. और हाँ ... अगर तुझे अपने भाई से चूत भी मरवानी पड़े तो मरवा लेना. नहीं तो कुछ अभी हो सकता है. इसके बाद फ़ोन कट हो गया. मैंने ये सब सुन लिया था. अब मीनू ने मेरी खातिर अपने कपड़े निकाले और एकदम नंगी हो गई अपने भाई के सामने. उसकी चूत और चूची देख कर मेरा लंड झटके मरने लग गया. फिर मीनू ने मेरे को एक चेयर पर बैठने के लिए कहा और खुद बैड के साइड में बैठ गयी और मेरे लंड पर तेल लगा कर मुठ मारने लग गई. मेरे मुख से सिसकारियां निकलने लग गयी- हाह ... अहा ... हाहा ... अह ... अहह ... अआह ... हा ... आह ... अह ... अह ... अहहा ... अह ... हा ... हा ... हा ... हा ... अह! उधर मीनू के सांसें भी तेज हो गयी थी और उसकी चूचियां, जो काफी बड़ी थी, बड़ी जोर से हिल रही थी. तभी मेरे मुख से निकला- लंड ... चूत ... लंड ... चूत! और मैंने अपनी जवान बहन की चूचियों को पकड़ लिया. मेरी बहन सिहर उठी. लेकिन मेरी हालत को देख कर कुछ नहीं बोली. उसके कोमल हाथ मेरे लंड पर सरपट चल रहे थे. मैं जोर जोर से उसकी चूचियां दबाने लग गया ताकि मेरा वीर्य निकल जाए. मीनू बोली- भाई आराम से दबाओ. तभी मेरे नज़र मेरी बहन की चूत पर गई जिसको मैंने अभी तक ठीक से देखा नहीं था. मेरी बहन की चूत बिल्कुल दो छोटी छोटी फांकों की तरह लग रही थी. चूत को देख कर मैंने अंदाजा लगा लिया था कि अभी तक इसने लंड नहीं लिया है किसी का. मेरी बहन की चूत अब पानी छोड़ रही थी. मीनू अब गर्म हो गई थी. मुझे पता था कि अब उसको सिर्फ चुदाई चाहिए. तभी मैंने अपनी बहन को लंड मुंह में लेने के लिए बोला. और उसने जल्दी से मेरा लंड मुंह में ले लिया. 'गप ... गप ... गप ... गप्प ... गप्पा ... गप ... उंह उंह उंह ... उंह ... उंह ... उंह' मीनू लंड को किसी रंडी की तरह अपने मुंह में ले रही थी. तभी मीनू ने लंड को छोड़ कर बैड पर लेट गयी और कहा- भाई, बस अब आखरी रास्ता यही बचा है कि ... आप ... मेरी चूत में लंड डाल ... अपना वीर्य निकालो. लेकिन भाई ... आपकी ... बहन ने आज तक किसी का लंड लेना तो दूर ... किसी का देखा भी नहीं था ... लेकिन ... आज मैं अपनी सील पैक चूत आपको दे रही हूँ ताकि आपका लंड शांत हो सके. प्लीज ... आप न चूत ... आराम से मारना ... आपका लंड बहुत बड़ा है ... शायद मेरी चूत बर्दाश्त न कर सके. मीनू बैड पर लेट गई और मुझे अपने ऊपर आने के लिए कहा. मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे कभी अपनी ही बहन की चूत मारनी पड़ेगी. लेकिन हम दोनों की मज़बूरी थी ... मीनू की चुदने की ... और मेरी अपनी बहन की चूत मारने की. कुछ देर तक मैंने अपनी बहन की चूची दबाई. फिर मेरी बहन बोली- भाई ... जल्दी लंड डाल चूत ... में ... अब तो मेरी चूत भी लंड मांग रही है. मेरी आँखें एकदम लाल हो चुकी थी. मैंने मीनू की टांगें चौड़ी की तो मुझे उसकी चूत से पानी निकलता नजर आया. मेरी बहन की चूत लंड के लिए तरस रही थी और मेरा लंड चूत के लिए. मैंने जैसे ही लंड चूत पर रखा तो वो अंदर नहीं जा रहा था. मीनू की चूत बहुत टाइट थी. मैंने अपनी बहन की तरफ देखा तो उसने कहा- मैं समझ गई कि आप क्या कहना चाहते हो. प्लीज आप मेरे टेंशन मत लो और अपना लंड मेरी चूत में डालो ... जल्दी! तभी मीनू ने अपने हाथ से लंड को चूत के मुंह पर लगाया. मैंने कहा- क्या तुम तैयार हो? तो मीनू ने कहा- हाँ. और मैंने जोर लगा कर एक धक्का मारा और उसी के साथ उसकी चीख निकल गई- आई ... माँ ... आई ... माँ ... मर गई ... उई ई ... इइ ... उई ... उई ... आई ... माँ! तभी मैंने उसके ऊपर लेटकर उसके होंठों को अपने होंठों में ले लिया और जोर से दो तीन धक्के मारे. उसके मुंह से गूंह गूंह ... गूंह ... उंह ... उंह ... उंह ... की आवाज निकल रही थी. जब मैंने अपने लंड की तरफ देखा तो वो बिल्कुल लाल हो गया था खून से सन कर! मीनू की चूत की सील टूट गई थी. अब वो जोर जोर से रोने लगी, बोलने लगी- भाई ... जल्दी जल्दी ... लंड को अन्दर बाहर करो ... मुझसे आप को लंड बर्दाश्त नहीं हो रहा. मैं अभी अब जोर जोर से बहन की चूत में धक्के मारने लगा. हर धक्के के साथ मीनू बोल रही थी- आई ... माँ ... आई ... माँ ... मेरी चूत ... उई ... उई ... माँ ... मेरी चूत फट गई ... भाई तुमने अपनी बहन की चूत फाड़ दी ... और जोर से ... लंड ... डालो ... लंड ... लंड ... लंड ... लं ... ड ... चूत ... चोदो अपनी बहन की चूत को ... मुझे अपनी रखैल बना लो ... मुझे अपने बच्चे के माँ बना दो ... लंड डालो लंड. मैं जोर जोर से बहन की चूत में लंड डाल रहा था. अब मैंने उसकी दोनों टांगों को अपने कन्धों पर रखा और लंड को पिस्टन की तरह उसकी चूत में डालता रहा. 'गच ... घप ... घप ... घप ... घप ... घप ... पट पट ... पट ... पट ... गच गच ... गच' की आवाज से कमरा गूंज उठा. अगले पचास मिनट तक गोलियों का असर रहा. तब तक मैंने मीनू को कभी पीछे से ... तो कभी लंड के ऊपर बैठाया. इस दौरान मीनू की चूत पांच बार अपना पानी छोड़ चुकी थी. अब मैंने मीनू को सीधा लिटाया और उसकी टांगों को अपने कन्धों पर रखा और घस्से मारने लगा. मीनू चीख रही थी. तभी मैंने कहा- मीनू ... मेरा ... छुटने वाला है. मीनू ने कहा- भाई ... चूत में मत छुटना ... नहीं तो आप ... पापा और मामा दोनों ... बन जाओगे. प्लीज भाई ... मेरी ... चूत ... में ... नही! और वो मुझे धक्का देने लगी. लेकिन सब बेकार ... आखरी धक्के में मैंने अपना पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया और ... और ... मेरे ... लंड से ... वीर्य ... की पिचकारियाँ निकलने लगी. दस पिचकारियाँ मैंने मीनू की चूत में मारी ... मेरे वीर्य से उसकी चूत भर गई और मैं एकदम उसके ऊपर गिर गया. मैं तक़रीबन बेहोश हो गया. मीनू बोल रही थी- भाई ... उठ जाओ. जब मैं अपँव बहन के नंगे बदन के ऊपर से हटा तो मीनू खड़ी हुई. तो वीर्य उसकी चूत से निकल कर उसकी खूबसूरत टांगों पर चलने लगा. मीनू ने जैसे ही चलना चाहां, उससे चला नहीं गया. जब उसने अपनी चूत को देखा तो चूत की दोनों फाकों के बीच दो उँगलियों का गैप हो चुका था. जैसे किसी के होंठ काफी सूज गए हों. फिर मीनू ने कहा- भाई, आपने मेरी चूत बिल्कुल ऐसी कर दी जैसी कुत्ते कुतिया की चूत कर देते हैं. और अपनी टाँगें चौड़ी करके चलने लगी. फिर सुबह तक मैं मीनू को दो बार और बजाया. अगले दो दिनों तक उसको मैंने कपड़े नहीं पहनने नहीं दिए. मीनू ने मुझे कहा- मैं आपके बच्चे की माँ बनना चाहती हूँ शादी के बाद! 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